ADHD — जब ध्यान लगाना और बेचैनी काबू में न आए
ਇਹ ਲੇਖ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਪੜ੍ਹੋ →ADHD क्या है?
हर बच्चा कभी न कभी शरारती या बेचैन होता है — यह बचपन का सामान्य हिस्सा है। ADHD (Attention-Deficit/Hyperactivity Disorder) तब कहलाता है जब ध्यान न लगा पाना, बहुत ज़्यादा बेचैनी या बिना सोचे काम करना — ये तीनों इतने ज़्यादा और लगातार हों कि पढ़ाई, दोस्ती और घर की ज़िंदगी पर असर डालने लगें। यह दिमाग़ के विकास से जुड़ी एक मेडिकल स्थिति है — बुरी परवरिश या बच्चे की ज़िद का नतीजा नहीं।
आम संकेत
- एक जगह बैठ न पाना, लगातार हिलते-डुलते रहना
- पढ़ाई या किसी भी काम में ध्यान बहुत जल्दी भटक जाना
- बात बीच में काटना, अपनी बारी का इंतज़ार न कर पाना
- बिना सोचे-समझे काम कर बैठना
- चीज़ें भूल जाना, सामान इधर-उधर खो देना
- निर्देश याद रखने या पूरा करने में दिक्क़त
यह “बिगड़ैल बच्चा” होना नहीं है
माता-पिता को अक्सर ताने सुनने पड़ते हैं — “ठीक से डाँटो नहीं&rdquo, “अनुशासन की कमी है” — जबकि ADHD बच्चे के दिमाग़ में ध्यान और आवेग नियंत्रण से जुड़े हिस्सों के काम करने के तरीक़े का फ़र्क़ है। डाँट या सज़ा से यह ठीक नहीं होता, सही समझ और सही मदद से बेहतर होता है।
इलाज और सहारा
सही जाँच के बाद व्यवहार-प्रशिक्षण (behaviour therapy), स्कूल के साथ तालमेल, और ज़रूरत पड़ने पर दवा — इन सबसे बच्चे की ध्यान लगाने और ख़ुद को सम्भालने की क्षमता में साफ़ सुधार आता है। जितनी जल्दी पहचान हो, बच्चे का स्कूल और घर का अनुभव उतना ही आसान होता है।
परिवार क्या करे?
- बच्चे की तुलना भाई-बहन या सहपाठियों से न करें
- छोटे, साफ़ निर्देश एक बार में एक काम के लिए दें
- अच्छे व्यवहार को नोटिस करें और सराहें, सिर्फ़ ग़लतियों पर टोकें नहीं
- स्कूल टीचर को भी साथ में शामिल रखें
डॉ. शर्मा का वीडियो

सही समझ से बच्चे का आत्मविश्वास वापस आता है।
कॉल करें, WhatsApp करें या सीधे OPD में आएँ — बात गोपनीय रहती है।
OPD: मंगल–रवि · 10:30–2:30 व 5:30–7:30 · सोमवार OPD बंद · इमरजेंसी 24/7