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ADHD — जब ध्यान लगाना और बेचैनी काबू में न आए

डॉ. मृदुल शर्मा (MBBS, MD न्यूरोसाइकेट्री) की देखरेख में · SSK न्यूरो-साइकेट्री हॉस्पिटल · सितंबर 2026 · 5 मिनट

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ADHD क्या है?

हर बच्चा कभी न कभी शरारती या बेचैन होता है — यह बचपन का सामान्य हिस्सा है। ADHD (Attention-Deficit/Hyperactivity Disorder) तब कहलाता है जब ध्यान न लगा पाना, बहुत ज़्यादा बेचैनी या बिना सोचे काम करना — ये तीनों इतने ज़्यादा और लगातार हों कि पढ़ाई, दोस्ती और घर की ज़िंदगी पर असर डालने लगें। यह दिमाग़ के विकास से जुड़ी एक मेडिकल स्थिति है — बुरी परवरिश या बच्चे की ज़िद का नतीजा नहीं।

आम संकेत

यह “बिगड़ैल बच्चा” होना नहीं है

माता-पिता को अक्सर ताने सुनने पड़ते हैं — “ठीक से डाँटो नहीं&rdquo, “अनुशासन की कमी है” — जबकि ADHD बच्चे के दिमाग़ में ध्यान और आवेग नियंत्रण से जुड़े हिस्सों के काम करने के तरीक़े का फ़र्क़ है। डाँट या सज़ा से यह ठीक नहीं होता, सही समझ और सही मदद से बेहतर होता है।

⚠ कब मदद लें? अगर स्कूल से बार-बार शिक़ायत आए, बच्चा ख़ुद को लगातार “बुरा बच्चा” समझने लगे, या घर में रोज़ की लड़ाई-झगड़े का कारण यही बने — तो आगे इंतज़ार न करें। कॉल करें — SSK 24/7 हेल्पलाइन 011 6931 0723

इलाज और सहारा

सही जाँच के बाद व्यवहार-प्रशिक्षण (behaviour therapy), स्कूल के साथ तालमेल, और ज़रूरत पड़ने पर दवा — इन सबसे बच्चे की ध्यान लगाने और ख़ुद को सम्भालने की क्षमता में साफ़ सुधार आता है। जितनी जल्दी पहचान हो, बच्चे का स्कूल और घर का अनुभव उतना ही आसान होता है।

परिवार क्या करे?

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ADHD के लक्षण कैसे पहचानें
ADHD के लक्षण कैसे पहचानें

सही समझ से बच्चे का आत्मविश्वास वापस आता है।

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