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बच्चे-किशोर · Children

बच्चों में मोबाइल की लत और पढ़ाई का तनाव — घर पर क्या करें, डॉक्टर कब

डॉ. मृदुल शर्मा (MBBS, MD न्यूरोसाइकेट्री) की देखरेख में · SSK न्यूरो-साइकेट्री हॉस्पिटल · अगस्त 2026 · 6 मिनट

कब समझें कि मोबाइल "शौक़" से "लत" बन गया है

दो-चार लक्षण हफ़्तों से बने हों, तो यह अनुशासन से आगे की बात है — बच्चे का दिमाग़ उसी "तलब" के चक्र में फँस रहा है जो किसी भी लत में होता है।

सिर्फ़ डाँट काम क्यों नहीं करती

डाँट और मार से बच्चा फ़ोन छोड़ता नहीं — छुपाना सीख जाता है, और घर में दूरी बढ़ती है। लत नियम + विकल्प + साथ से छूटती है, अपमान से नहीं।

घर के 6 नियम जो सच में काम करते हैं

  1. खाने की मेज़ और बेडरूम फ़ोन-मुक्त — रात में सबके फ़ोन कमरे के बाहर चार्ज हों (माँ-पापा के भी)
  2. स्क्रीन-समय की सीमा बच्चे के साथ बैठकर तय करें — थोपे हुए नियम टूटते हैं, मिलकर बनाए टिकते हैं
  3. सोने से एक घंटा पहले सभी स्क्रीन बंद
  4. ख़ाली समय का विकल्प दें — खेल, साइकिल, दोस्त, कोई ज़िम्मेदारी; ख़ाली हाथ से फ़ोन नहीं छूटता
  5. अपना उदाहरण — जो घर स्क्रॉल करते हुए खाना खाता है, वहाँ बच्चा नियम नहीं मानता
  6. एक झटके में ज़ीरो नहीं — धीरे-धीरे घटाएँ, और अच्छे दिन की तारीफ़ करें

पढ़ाई और इम्तिहान का तनाव

थोड़ा दबाव ठीक है; पर लगातार आँसू, नींद उड़ना, स्कूल के नाम पर पेट दर्द/सिरदर्द, "मुझसे नहीं होगा" — ये संकेत हैं कि बोझ बच्चे की क्षमता से बड़ा हो गया है। नंबरों से पहले बच्चा है — यह भरोसा घर से मिलना चाहिए।

⚠ इसे कभी हल्के में न लें बच्चा "मर जाना चाहता हूँ", "मैं बोझ हूँ" जैसी बातें कहे, ख़ुद को चोट पहुँचाए, या अचानक बिल्कुल चुप हो जाए — तो यह "ड्रामा" नहीं है। उसी दिन बात करें और मदद लें: SSK 24/7 हेल्पलाइन 011 6931 0723 या Tele-MANAS 14416

डॉक्टर के पास कब लाएँ

नियम आज़माने के बाद भी 3–4 हफ़्तों में सुधार न हो, नींद-पढ़ाई-व्यवहार लगातार बिगड़ें, या बच्चा उदास/चिड़चिड़ा रहने लगे — तो जाँच करा लें। SSK में बच्चों-किशोरों की समस्याओं की जाँच और काउंसलिंग होती है — बच्चे को डाँट नहीं, समझ मिलती है, और माँ-पापा को साफ़ योजना।

बात करने से शुरुआत होती है।

कॉल करें, WhatsApp करें या सीधे OPD में आएँ — बात गोपनीय रहती है।

OPD: मंगल–रवि · 10:30–2:30 व 5:30–7:30 · सोमवार OPD बंद · इमरजेंसी 24/7

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