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ऑटिज़्म · Autism

ऑटिज़्म — बच्चे के अपनी दुनिया से जुड़ने का अलग तरीक़ा

डॉ. मृदुल शर्मा (MBBS, MD न्यूरोसाइकेट्री) की देखरेख में · SSK न्यूरो-साइकेट्री हॉस्पिटल · सितंबर 2026 · 5 मिनट

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ऑटिज़्म (Autism) क्या है?

ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर दिमाग़ के विकास से जुड़ी एक स्थिति है, जो बच्चे के बात-चीत करने, लोगों से जुड़ने और आस-पास की दुनिया को समझने के तरीक़े को अलग बनाती है। “स्पेक्ट्रम” शब्द इसलिए है क्योंकि हर बच्चे में यह अलग-अलग रूप और तीव्रता में दिखता है — कोई बहुत हल्के लक्षणों के साथ सामान्य स्कूल में पढ़ता है, किसी को ज़्यादा सहारे की ज़रूरत होती है। यह माता-पिता की परवरिश की ग़लती से नहीं होता।

शुरुआती संकेत (2-3 साल की उम्र में)

“बड़ा होकर ठीक हो जाएगा” सोचकर इंतज़ार न करें

बहुत से परिवार शुरुआती संकेतों को “देर से बोलने वाला बच्चा है, अपने-आप ठीक हो जाएगा” समझकर टाल देते हैं। जितनी जल्दी सही जाँच और थेरेपी शुरू होती है, बच्चे के बोलने, सीखने और लोगों से जुड़ने की क्षमता उतनी ही बेहतर विकसित होती है। यह किसी की ग़लती नहीं है, पर देरी बच्चे का नुक़सान कर सकती है।

⚠ कब जाँच करवाएँ? अगर डेढ़-दो साल की उम्र तक बच्चा नाम पर प्रतिक्रिया न दे, इशारा न करे, या बोलना शुरू करके फिर बोलना बंद कर दे — देर न करें, जाँच करवाएँ। कॉल करें — SSK 24/7 हेल्पलाइन 011 6931 0723

इलाज और सहारा

ऑटिज़्म का कोई एक “इलाज़” नहीं, बल्कि सही थेरेपी (स्पीच थेरेपी, बिहेवियर थेरेपी, ऑक्युपेशनल थेरेपी) से बच्चा बोलना, दूसरों से जुड़ना और रोज़मर्रा के काम सीखता है। हर बच्चे की ज़रूरत अलग होती है — SSK में सही जाँच के बाद बच्चे के हिसाब से योजना बनाई जाती है।

परिवार क्या करे?

डॉ. शर्मा का वीडियो

ऑटिज़्म के शुरुआती संकेत
ऑटिज़्म के शुरुआती संकेत

जितनी जल्दी शुरुआत, उतना बेहतर भविष्य।

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