नींद नहीं आती? 8 आसान नियम — और कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है
ਇਹ ਲੇਖ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਪੜ੍ਹੋ →नींद क्यों बिगड़ती है?
ज़्यादातर मामलों में वजहें रोज़मर्रा की होती हैं — तनाव, देर रात मोबाइल, शाम की चाय-कॉफ़ी, सोने-उठने का बदलता समय। लेकिन कभी-कभी बिगड़ी नींद किसी बीमारी का लक्षण होती है — जैसे चिंता, डिप्रेशन, या नींद के अपने विकार। पहले आसान नियम आज़माइए; असर न हो तो डॉक्टर से मिलिए।
अच्छी नींद के 8 आसान नियम
- सोने और उठने का समय रोज़ एक ही रखें — छुट्टी के दिन भी
- सोने से एक घंटा पहले मोबाइल और टीवी बंद — स्क्रीन की रोशनी नींद का हॉर्मोन दबा देती है
- दोपहर बाद चाय, कॉफ़ी या कोल्ड ड्रिंक नहीं
- दिन में लंबी झपकी नहीं — लेनी ही हो तो 20 मिनट तक
- बिस्तर सिर्फ़ सोने के लिए — बिस्तर पर मोबाइल, खाना या काम नहीं
- कमरा अंधेरा, शांत और ठंडा रखें
- दिन में थोड़ी धूप और हल्की सैर या कसरत — पर सोने से ठीक पहले नहीं
- 20 मिनट में नींद न आए तो उठ जाएँ, धीमी रोशनी में कुछ शांत करें, नींद आने पर लौटें — बिस्तर पर करवटें गिनना नींद का दुश्मन है
डॉक्टर से कब मिलें?
- ये नियम अपनाने के बाद भी समस्या तीन हफ़्ते से ज़्यादा चले
- दिन में नींद के झोंके — काम, पढ़ाई या गाड़ी चलाने पर असर
- ज़ोर के खर्राटे और सोते में साँस रुकती लगे (यह अलग बीमारी हो सकती है)
- नींद के लिए शराब या ख़ुद से ली गई गोली का सहारा लेना पड़े
- साथ में उदासी, घबराहट या बहुत ज़्यादा सोचते रहना हो
⚠ नींद की गोली ख़ुद से न लें
बिना जाँच के ली गई नींद की दवा आदत बन सकती है और असली वजह — जैसे डिप्रेशन, चिंता या साँस की समस्या — छिपी रह जाती है। डॉक्टर पहले कारण ढूँढते हैं, फिर सही और सीमित इलाज देते हैं। सवाल हो तो 011 6931 0723 पर कॉल करें।
SSK में नींद की जाँच और इलाज
हम नींद न आने, ज़्यादा नींद, बुरे सपनों और नींद में असामान्य हरकतों — सबकी जाँच करते हैं। ज़रूरत पर EEG यहीं उपलब्ध है, और चिंता या डिप्रेशन साथ हों तो उनका इलाज भी एक ही छत के नीचे होता है।
बात करने से शुरुआत होती है।
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