डिलीवरी के बाद उदासी — कब यह सामान्य है, कब नहीं
ਇਹ ਲੇਖ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਪੜ੍ਹੋ →“बेबी ब्लूज़” और पोस्टपार्टम डिप्रेशन में फ़र्क़
डिलीवरी के बाद हारमोन में बड़ा बदलाव आता है, और लगभग हर नई माँ को कुछ दिन उदासी, रोना, थकान महसूस हो सकती है — इसे “बेबी ब्लूज़” कहते हैं, यह आमतौर पर दो हफ़्ते में अपने-आप ठीक हो जाता है। अगर उदासी, चिंता या थकान दो हफ़्ते से ज़्यादा बनी रहे, या गहरी होती जाए — तो यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन हो सकता है, जो एक असली मेडिकल बीमारी है, माँ की कमज़ोरी या ग़लती नहीं।
आम लक्षण
- लगातार उदासी, रोने का मन, या भावना का सुन्न पड़ जाना
- बच्चे से जुड़ाव महसूस न होना, या ख़ुद को बुरी माँ समझना
- बहुत ज़्यादा चिंता या घबराहट
- नींद न आना, भले ही बच्चा सो भी जाए
- हर रोज़मर्रा का काम बहुत भारी लगना
- ध्यान न लगना, छोटे-छोटे फ़ैसले भी न ले पाना
यह माँ की ग़लती नहीं है
भारतीय परिवारों में अक्सर इसे “कमज़ोरी” या “नाटक” समझ लिया जाता है — जबकि यह हारमोन और दिमाग़ में असली बदलाव है। ताने या तुलना (“बाक़ी सब माँएँ तो सम्भाल लेती हैं”) हालत को बदतर बनाते हैं। सही सहारा और इलाज से माँ पूरी तरह ठीक हो जाती है।
परिवार (ख़ासकर पति और घर के बड़े) क्या करें?
- बच्चे और माँ दोनों की देखभाल में हाथ बँटाएँ, ताकि माँ को नींद और आराम मिल सके
- “सब माँएँ ऐसे ही सम्भालती हैं” कहकर बात को हल्का न करें
- माँ की बात बिना जज किए सुनें
- लक्षण दो हफ़्ते से ज़्यादा दिखें तो डॉक्टर को दिखाएँ, देर न करें
इलाज और सहारा
काउंसलिंग से, और ज़रूरत पड़ने पर स्तनपान को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित दवाओं से इलाज होता है — डॉक्टर हर दवा स्तनपान की स्थिति देखकर ही तय करते हैं। ज़्यादातर माँएँ कुछ हफ़्तों से महीनों में काफ़ी बेहतर महसूस करने लगती हैं। SSK में यह बातचीत पूरी गोपनीयता और सम्मान के साथ होती है।
अकेले सम्भालने की ज़रूरत नहीं है।
कॉल करें, WhatsApp करें या सीधे OPD में आएँ — बात गोपनीय रहती है।
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